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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

हमारी शुभकामना आपके साथ है ।

देश संकट की ओर है लिखा था कवि ने

तब से गुजर गया 10 साल है ।

अभी छह माह पहले भी पुनः लिखा

देश पर आने वाला बड़ा आपात है।।


बहुत सी आहटें दी है तीन दशक तक

मगर घोर पाखंड धर्म सत्तावाद है ।

भौतिक चकाचौंध में आदमी ने आज

खुद खड़ा कर लिया विनाश काल है ।।


विकराल स्थितियों से गुजर रहा है देश

मानो आ ही गया अपूर्व आपातकाल है।

बेघर निर्दल संदेशवाहक हूँ आपका

धैर्य रखें कुछ नहीं होगा हमारा विश्वास है।।


कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करें

हमारी शुभकामना आपके साथ है।

हर घर व्यक्ति की पूर्ण व्यवस्था का

उत्तरदायित्व सरकार पर आज है ।।

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