• Facebook
  • Instagram
  • YouTube
Search
  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

सावन के अंधों को ।।जनकवि निर्दलबंधु

भ्रष्ट दागी बागी डॉन माफिया उजड्ड़ों को कौन रोक सका धन बाहुबली दबंगों को ।।

जानवर की तरह टूट पड़े हैं एक दूसरे पर पहली बार सुना चुनाव में यहां अपशब्दों को ।।

सियासी खुन्नस देखी गई रामदेव जैसे संतों को । कौन रोक सका जाति धर्म सत्ता के गोरखधंधों को ।।

पूंजी कंपनीवाद का गुलाम हो गया देश कौन देख सका करोड़ों भूखे प्यासे नंगो को ।।

क्या गुजर रही है अभी जनमानस पर हरा ही हरा दिख रहा है सावन के अंधों को ।।

1 view