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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

व्यवस्था बदलो स्तिथि सुधारो ।

यह देश घृढित निजी स्वार्थों को लेकर

जाति धर्म सत्ता का उन्माद फैलाया ।

आपस में खूब लड़ता भिड़ता रहा

वह सोने का भारत बर्बाद कराया ।।


पाखंडवाद व आडम्बर में डूबा रहा देश

तीर्थों मठ मंदिरों में अकूत भंडार उडाया ।

करोडो देवी देवताओं की धरती पर वहीं

क्रूर लुटेरों ने खूनी उत्पात मचाया ।।


या तो लूट ले गया गजनवी सोमनाथ को

या पद्मनाथ पर डेरा काल नाग जमाया।

आज तिरुपति, बालाजी,साईं ,सिद्धिविनायक जैसे

मंदिरों में लाखो टन सोना किस काम आया।।


अपार संघर्ष किया अपूर्व बलिदान दिया

भारत के लालों ने देश आजाद कराया ।

पूजी सामंती वर्गों की सरकार आई और

करोड़ों जनता को कंगाल निहाल बनाया।।


जहां कहीं भी जरा आवाज उठी तो

दमन उत्पीड़न और बमबाट कराया ।

छल बल दल से खूब बहुमत लूटा और

अपना-अपना दबंगई राज बहाल कराया ।।


गणतंत्र भारत में 25 वर्ष के भीतर

सन् 1975 में भीषड आपातकाल आया ।

उससे भी बड़े आपात काल की ओर आज पुनः

यह फर्जी सुशासन व स्वराज आया ।।


कहां सुख शांति कहां अच्छे दिन आज

यह घोर बुरे दिनों का हाय हायकार छाया ।

वैचारिक वैमनस्य सांप्रदायिक अलगाव अरे

अमन चमन में हर तरफ आग लगाया ।।


कोरोना से बचाव हेतु जहां चीन ने आज

10 दिन के भीतर अस्पताल बनाया ।

सत्तारूढ़ दल भारत में उसी 10 दिन के अंदर

मध्य प्रदेश में अपनी सरकार बनाया ।।


ताईबान ने बंदूकें छोड़ सैनिकों से जहां

वायरस नाशक का खूब छिड़काव करवाया ।

वहीं भारत के महाराज मोदी जी ने

घर-घर से खूब थाली ,परात बजवाया ।।


बिना पूर्व व्यवस्था सेवा साधन समाधान के

अचानक लॉकडाउन रातों-रात कराया।

अब जरूरतमंद जनता फुटपाथ में आई

अरे जनता कर्फ्यू लठमार चलाया ।।


अब तो करें पूर्ण सिस्टम से बचाव

अगर अभी भी आवश्यक अभियान चलाया ।

तो बचाया जा सकता है देश को महामारी से

इस निर्दल बेघर को यही एक ख्याल आया ।।


व्यवस्था बदलो स्थिति को संभालो

दशकों तक जनकवि यही आवाज लगाया ।

अभी भी शुभकामना है देशवासियों के साथ

अनर्थ नहीं होगा अभी यदि विश्वास जताया ।।

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