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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

मंदिर मस्ज़िद के नाम- "यही सत्य सिद्ध अन्तिम चेतना चुनौती है"।

Updated: Dec 3, 2019

अखिल भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान समिति के निदेशक डॉ नवल वियोगी तथा बाजपुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय के उपाचार्य डॉ मोहम्मद अनवर अंसारी के एक संयुक्त शोध सन 2006 के अनुसार उत्तर पर्वतीय भारत विश्व मानव सभ्यता के इतिहास में उत्तरा पथ कहा गया है । अतः विश्व की अनेक अनेक सभ्यताओं वह धर्म सांप्रदायिक ताकतों ने एक के बाद एक के लिए यह उत्तरा पथ बनाया। आदिकाल से ही निजी स्वार्थ व सुख भोग से प्रेरित मानव ने निर्बल मानव पर क्रूर राज किया ।मध्य युग तक विश्व की लिप्त लोलुप प्रबल ताकतों ने दो तिहाई विश्व की निर्बल जनता को अपना गुलाम बना डाला। यूरोपीय देशों की रोमन कैथोलिक चर्चों से लेकर जेम्स द्वितीय, लुइ सोलहवे व निकोलस जार तक उस घोर अत्याचार का इतिहास आज गवाह है। आदि काल से ही भारत भूमि में इन प्रबल ताकतों ने अपना राज्य फैलाकर यहां का अपार अमन चैन लूटना चाहा। आज से लगभग साढे 4000 वर्ष पहले यूनान के आर्यों ने यहां भीषण आक्रमण किया यहां की विश्वविख्यात महान नाग संस्कृति को उजाड़ डाला। जिसमें 1000 वर्ष का लंबा समय लगा था।आर्यो ने यहां के मूल निवासी नाग बंसजो यानी द्रविड़ों को अपना गुलाम बनाया। उन्होंने ब्रह्म ब्राह्मणवाद का घोर आडंबर रच देश की 80% निर्मल भोली भाली मेहनतकश जनता को स्वार्थ शोषण की दहकती हुई भट्टी में झोंक दिया ।उन्होंने यहां वैदिक धर्म की स्थापना कर इस मौलिक जनता पर अधर्म और अत्याचार ढाया, मगर वे नागराजा और उसके वंशज न्याय प्रिय नेक और आदर्श थे उन्हें उजाड़ कर इस धर्म ने फिर कभी अच्छा नहीं देखा ।उनके दिवंगत आत्माओं का आक्रोश विश्व की क्रूर ताकतों के अन्तः से इस भारत भूमि पर फूट पड़ा। वैदिक काल से ही भारत भूमि आंतरिक और बाहरी आक्रमणों से भर उठी और आज तक इसका एक लंबा इतिहास है। नेक निर्दोष बेगुनाह भारतीयों को उजाड़ कर आर्यो ने यहाँ शक यवन हुड़् मंगोल,डच,अफगान व तुर्क आदि आक्रमको से लेकर दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य व अंग्रेजी हुकूमत तक घोर उत्पाटन और दमन ही दमन झेले हैं । विशेषतः सन 712 में अरब के मोहम्मद बिन कासिम ने यहां सिंध के ब्राह्मण राजा दाहिर पर आक्रमण कर उसका राज्य लूट लिया वहीं से दुनिया के आक्रमक मुसलमानों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने एक के बाद एक आक्रमणों से उस ब्रह्म ब्राह्मण बाद को पंगु बना डाला। फिर भी हरसंभव इस धर्म ने अपनो पर घोर अत्याचार ढाना नहीं छोड़ा । जैसे कि सन् 788 में केरल में जन्मे जगतगुरु शंकराचार्य नवी सदी के प्रारंभ में पहाड़ की ओर आ गए । उन्होंने यहां राजा सुन्धवा की फौज लेकर लाखों अनुयायियों को मौत के घाट उतार डाला इसी अत्याचार के बदले सन 820 मैं यहां केदारधाम पर उनकी अल्प आयु में अकाल मृत्यु हो गई और मुद्दतो रहम के बाद आज दुनिया ने देखा उनके जन्म स्थल केरल तथा मरण स्थल केदार दोनों आज विनाशकारी प्रलयंकार की चपेट में हैं ।अतः वे असंख्य दिवंगत दिव्य आत्माएं अनंत दिव्य शक्ति स्वरूप इन बुतपरस्तो को बार-बार सचेत और सावधान करती रही है ।मगर यह चेतने वाले नहीं हैं और किसी बड़े महा विनाश की ओर अग्रसर हैं शंकराचार्य द्वारा ढाया गया वह अत्याचार इस क्रूर धर्म का काला इतिहास बना और आगे महा विनाशकारी आक्रमणों ने इस धर्म को सबक सिखाया। 11 वीं सदी के प्रारंभ में एक मुसलमान आक्रमक महमूद गजनवी ने यहां 17 खूनी आक्रमण कर त्राहि-त्राहि मचा डाली उसने सन 1025 में देश के सबसे बड़े आस्था धाम सोमनाथ मंदिर को तोड़ धवस्त कर डाला और वहां से मथुरा में आकर कृष्ण धाम को भी तोड़ गिरा डाला । गजनवी ने सोमनाथ से सोने चांदी हीरे मोती आदि ज्वाहरात से बनी मूर्तियों व साज सज्जा के रत्नों को अपने 40 ऊँटो में लादकर ढोया था और कंचन नगरी मथुरा धाम को लूट डाला था ।तब वह त्रिलोकी नाथ शिव शंकर कहां डमरू बजाते भूत पिशाचों की बारात जुटाते रहे और कहा वे कृष्ण मुरारी बंसी बजाते ,रिझाते -खिझाते,रास रचाते ,अखियां लढाते,सम्मोहन सजाते रहे ?

सन 1394 में तैमूर लंग ने देश के दिल दिल्ली में प्रथम भीषण रक्तपात मचा डाला , उसने लाखों हिंदुओं को मौत के घाट उतार डाला ।कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर महाभारत देख रहे वे 33 करोड़ देवता सच आज कहां चले गए? क्यों वे अपने भक्तों का रक्त पात देखते रहे? सैकड़ों वर्षों तक मुसलमानों ने इस हिंदू धर्म को रौद कुचल डाला और दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगल काल तक इस ब्रह्म ब्राह्मणवाद पर लगभग 800 साल राज किया है ।परिणाम स्वरूप ये एक दूसरे पर आक्रमक हो उठे और आपस में लड़ भिड़ कर देश अंग्रेजों का गुलाम बना डाला। मुसलमानों ने अब हिंदुओं से एक नाता जोड़ देश को आजाद करने के लिए संघर्ष भी शुरू किए। मुस्लिम महिला शक्ति हजरत बेगम ने सन 1857 में आजादी के प्रथम गदर को अग्रसर किया और बहादुर जफर शाह ने ही अंग्रेजों से अंतिम लोहा लिया। इस तरह लगभग 1200 साल तक आज यहां हिंदू और मुस्लिम धर्म ही मुख्यतः इस देश की वर्तमान और भावी दिशा और दशा के लिए उत्तरदाई हैं। इनका आपसी झगड़ा व आवाम का बंटवारा आज भी कम होने का नाम नहीं लेता है ।विशेषतः वर्तमान साढ़े चार सौ बरसों से ये राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के लिए लड़ रहे हैं ।सवाल मुख्यतः आज अयोध्या में अपने-अपने मालिकाना हक का है ।

ऐतिहासिक व धार्मिक उल्लेखों के आधार पर वृत्तांत इस प्रकार है कि कभी अयोध्या में राम ने जन्म लिया था राम की मृत्यु के बाद अयोध्या में भीषण बाढ़ आई और अयोध्या की विरासत नष्ट हुई । उनके पुत्र कुश ने इसका नवनिर्माण कर वहां राम का मंदिर बनाया ।वह भी जीण षिंड होता गया जिसका ईसा से 57 वर्ष पूर्व राजा विक्रमादित्य ने जिढ़ोद्वार कराया फिर भी उसी स्थिति में आता रहा और मध्ययुग पर मुसलमानों की निगाह में फिर गया। सोमनाथ और कृष्ण धाम के बाद वे अब राम मंदिर क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का संघर्ष करने लगे।

इसी क्रम विशेषतः सन 1033 में महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार तुर्क ने राम मंदिर को अपने अधिकार में लेने की योजना बनाई मगर सुनिश्चित व सुनियोजित योजना ना होने पर वह सफल नहीं हुआ और बहराइच में मारा गया। फिर भी सन् 1440 तक जौनपुर के शर्की शासक मोहम्मद शाह ने अयोध्या राम मंदिर पर अपना अधिकार जमा लिया।

हिंदुओं ने मंदिर को बचाने के लिए प्रयास किए मगर वह सफल नहीं हो सके और 21 मार्च 1528 को बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बांकी ने तोप से राम मंदिर को उड़ा डाला।

इसके बाद ही हिंदुओं ने अपने आप में सामर्थ्य होने की कवायद शुरू की इसके लिए उन्हें सैकड़ों वर्षों तक मुसलमानों से युद्ध लड़ने पड़े। मुख्यतः सन 1530 में हिमायू से लेकर सन 1707 में औरंगजेब तक हिंदुओं ने राम मंदिर वापसी के लिए 76 युद्ध लड़े थे। जिसमें जयराज कुंवरि,संत महेशानंद, वैष्णो दास ,कुंवर गोपाल सिंह तथा ठाकुर जगदंबा सिंह आदि कई हिंदू नेतृत्व कारी रामभक्त मारे गए। अंततः सन 1949 में हिंदू उस मंदिर स्थान पर नमाज पढ़ने से मुसलमानों को रोक सके। आज 6 अगस्त 1992को लालकृष्ण आडवाणी जैसे शीर्ष भाजपा नेता की उपस्थिति में बाबरी मस्जिद को गिराने में सफल हुए।

विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मोहन भागवत के सहयोग से भाजपा ने इस संघर्ष को चुनावी एजेंडा बनाकर आज देश दुनिया में भगवा परचम लहरा ही डाला है ।आज 9 नवंबर 2019 को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जिसमें एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं, 5 सदस्यीय संविधान पीठ के तहत फैसला दिया गया है कि विवादित क्षेत्र पर राम का ही मंदिर बनेगा ।45 दिन की सुनवाई के बाद अपने 1045 पृष्ठों के फैसले में कोर्ट ने उपलब्ध प्रमाणों व साक्ष्यों के साथ निर्णय लिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट इसी विवादित क्षेत्र पर मंदिर बनाए और वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अनयंत्र 5 एकड़ जमीन प्रदान की जाएगी।

यहां पर राम और अल्लाह का सवाल नहीं है। वे उनके मानने वालों के भगवान हों या वे उनके नाम अपने आप को दुनिया के शहंशाह व धनी बनाने की होड़ में हों इससे भी हमें या कोर्ट को कोई वास्ता नहीं है ।वास्ता है तो बस विवादित भूमि पर मालिकाना हक से है ।अतः कोर्ट के इस फैसले के बाद हिंदू और मुसलमानों ने मंदिर मस्जिद का झगड़ा बंद कर देना चाहिए।

यदि वहां पर राम मंदिर होता ही नहीं तो फिर बाबरी मस्जिद का वहीं पर अस्तित्व बना रहता मगर इतिहास सिद्ध करता है कि वहां पर मुसलमानों के आगमन के बहुत पूर्व से ही मंदिर मौजूद था अर्थात इस क्षेत्र पर हिंदुओं का मालिकाना हक है जिसके लिए उन्होंने सैकड़ों वर्ष युद्ध लड़े हैं ।इसलिए इनका मालिकाना हक संवैधानिक दायरे में आता है और कोर्ट ने जो निर्णय लिया है उससे आज दोनों पक्षों को सहमत हो जाना चाहिए क्योंकि यह फैसला किसी से छेड़खानी नहीं करता है।


भले ही कोर्ट ने अपने फैसले में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद तोड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र बताया और अवैध कार्य का आरोप लगाया है मगर 21 मार्च 1528 को मुसलमानों ने ही पहली गलती की थी इसलिए इन दोनों पक्षों को सहमत होकर सद्भाव सहानुभूति और सहयोग की भावना के साथ देश की सुख शांति को कायम रखना होगा और सैकड़ों वर्षों का झगड़ा बंद कर एकता का परिचय देना होगा ।आज यहां पर यही मान लेना उचित होगा कि राम और अल्लाह के नाम देश के हिंदू मुस्लिम कर्णधारों को अब घर आडंबर से बाहर से बाहर निकलने की आवश्यकता है। जब जब देश पर आपात आपदाएं आती रही तब तब न राम आए ,न खुदा ।हर युग हर काल की जनता ने ही अपनी जान पर खेलकर अपने लक्ष्य हासिल किए हैं। यह मंदिर मस्जिद केवल बुतपरस्तो के माध्यम है जिनके तहत इनकी इच्छाएं व तमन्ना हासिल होती हैं कि वे एक-दूसरे से सक्षम और धनी बने रहें जहां तक हिंदू धर्म की शक्ति भक्ति का सवाल है इसे आदिकाल से ही दुनिया की लिप्त लोलुप क्रूर प्रबल ताकतों ने अपना गुलाम बनाया ।हम मान लें कि हिंदुओं ने एक अत्याचारी रावण खड़ा कर, एक अवतार राम खड़ा कर डाला मगर सच जब जब देश में विश्व की दंगाई ताकतेँ एक-एक कर अत्याचार ढाती रही तब वे अवतार क्यों नहीं ?यह ठीक है राम का जन्म अयोध्या में हुआ और आज हिंदुओं को अपना मालिकाना हक मिला मगर हिंदुओं को अब हिंदुओं पर राम नाम की लूट बंद करनी होगी इन मंदिरों ने देश का अपार सुख वैभव उड़ाया और लुटाया है इन मंदिरों में होड़ है कि सबसे धनी कैसे बने और सबसे कमाई का साधन कौन सा अवतार होगा ।सोमनाथ की तरह आडंबर व पाखंड के इस अपार काले भंडार को या तो महमूद गजनबी जैसे लुटेरे लूट ले गए या फिर पद्मनाभ के जैसे अतुल भंडार में कालनाग लिपट गये।

सोमनाथ से लूटी 40 ऊँटो में लदी जवाहरात आज क्या कीमत रखती है ।जयेंद्र सरस्वती, ज्ञानेंद्र, आसाराम, गुरमीत राम रहीम, रामपाल जैसे मार्गदर्शक व संतों को ऐश की जिंदगी जीने के लिए कितनी संपत्ति की आवश्यकता होती है ?पद्मनाभ मंदिर में कितनी संपत्ति जप्त है। आज मुख्यतः तिरुपति महाराज ,बालाजी महाराज, सिद्धिविनायक व शिर्डी बाबा जैसे बड़े मंदिरों में जप्त 20 लाख टन सोने का क्या मूल्य है। जहां आस्था धामो धर्म शिक्षा केंद्रों में अपार काला भंडार ढेर हुआ, वही गोरे काले अंग्रेजों के हाथ निरंतर यहां से अपार समृद्धि विदेशों में ढेर होती रही और देश दुनिया का सबसे कंगाल और भ्रष्टाचारियों का भारत बन गया। इन मंदिरों ने हर तरफ अशांति और अलगाव ही अलगाव पैदा किया है जिसमें सोमनाथ से लेकर सन 1984 स्वर्ण मंदिर तक खूनी बिभिषिकाओ को इस धर्म दर्शन के इतिहास में कभी नहीं भुलाया जा सकता है ।साथ ही धरती के स्वर्ग तीर्थ खंड सबसे बड़े सुखधाम केदार में सड़ती हुई लाशों की बदबू भी इस महकते हुए चमन से कभी नहीं जा सकेगी ।इसके साथ ही आदिकाल से ही इस धर्म दर्शन के दामन पर अनेकानेक साधकों दिगदर्शकों ने जो काले दाग लगाए हैं वह भी अमिट हैं। अलग-अलग धर्म संप्रदायों से प्रेरित ये आस्था धाम स्वार्थ के केंद्र बन जाते हैं और मानव धर्म का बंटवारा करते हैं। उदाहरण के लिए हिंदुओं के मंदिरों में प्रवेश करने पर दलितों के सिर फूट गए ।वह भगवान जो देश की 80% शिल्पीओं से अलग खड़े कर दिए गए क्या वे दुनिया के भगवान हो सकते हैं? दुनिया का भगवान क्या नहीं कर सकता है ।दुनिया का भगवान कौन होता है ?वह भगवान कब कहां किसने देखा और कहां उसका मंदिर बनाया? क्या जिस राम कृपा से समुद्र में पत्थर तैरने लगे परम भक्त पवनपुत्र आसमान में उड़ने लगे जो सूर्य को भी निकल गए और क्या जिस राम कृपा से पूछ में आग जलाकर लंका भस्म हो गई, वह राम कृपा अपने भक्तों का मंदिर बचाने में मेहरबान नहीं हो सकी? क्या वह अंतर्यामी सर्वव्यापी भगवान नहीं जानते थे कि सीता को कौन चोर ले गया और कहां उसे रखा गया है ?क्या शेषनाग के अवतार पृथ्वी पटक सकते थे उस एक मेघनाथ को नहीं पटक सकते थे ?क्या वह भगवान सुमेरु पर्वत को उठा ला मगा सकते थे उस अशोक वाटिका को उठा ला नहीं गा सकते थे ।यदि ऐसा हुआ होता तो क्यों फिर आज युगों युगो कीफजीहत के बाद कोर्ट में मालिकाना हक माँगने आना पड़ता?

यह ठीक है राम के मानने वालों का मंदिर निर्माण का मालिकाना हक मिल गया और हिंदू भले दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर लगा ले अरबों खरबों की बिसात बिछा ले और राम नाम की लूट मचा ले लेकिन इस देश की भलाई के लिए न कभी राम आने वाले हैं और न ये मंदिर ।जो राम नाम के तूफान में आज आसमान में उड़ने लगे हैं उन्हें इसी धरती पर पटकी खाकर चित भी होना है ।राम नाम की लहर देख मुसलमान के मन में भी अल्लाह खुदा की लहर अवश्य दौड़ रही होगी। वह सुन रहा है कि दुनिया का भगवान अयोध्या में बस गया है ,वह सुन रहा है कि मंदिर निर्माण के लिए अरबों खरबों की माया जुटने लगी है, तो वह जो एक कब्र को भी दुनिया का आश्चर्य ताज बना देता है वह न जाने अपनी मस्जिद को कैसा बना दे ।वह इसके लिए न जाने क्या क्या करेगा, वही जाने। तू सेर मैं सवा सेर वाले यह दो धर्म आडम्बर के अखाड़ो में कब तक देश की अपार सुख समृद्धि उड़ा डालेंगे और कब तक करोड़ों भारतीयों को अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसकर अपने आप में शहंशाह और धनी होने का महाभारत लड़ते या बादशाहत गड़ते रहेंगे जहां एक तरफ हिंदुओं ने राममंदिर मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ साधे हैं वहीं मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद के नाम हिन्दू मुस्लिम बाटे है । जहां कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राजीव त्यागी कहते हैं कि हमने आंदोलन लड़ा और ताला खुलवाया ,श्रेय भाजपा लूट रही है ।बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के बाद शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा था कि आज हमें गर्व है और पिछले वर्ष उद्धव ठाकरे ने कहा था कि भाजपा ने कोर्ट को निर्णय के लिए सधी हुई प्रक्रिया दी है और आज भाजपा का भोंपू बजा रही मीडिया भी "नरेंद्र मोदी अनंत शक्ति" की हवा देने में पीछे नहीं है वहीं दूसरी तरफ आज फैसले के 9 दिन बाद ऑल इंडिया पर्सनल मुस्लिम लॉ बोर्ड व सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय ले लिया है। मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए याचिका दायर करने का मन बना लिया है। साथ ही असदुद्दीन ओवैसी ने बोर्ड की बैठक में यह कहा है कि दुनिया क्या कहे क्या नहीं मगर "मुझे अपनी मस्जिद चाहिए"।

जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि याचिका दायर करना हमारा हक है भले ही हमारी याचिका खारिज कर बिपक्ष हमारे हक को दबाने का प्रयास करते रहे हम भी संघर्ष करते रहेंगे, और जमीन खरीद कर मस्जिद बना लेंगे। वैसे तो 30 सितंबर 2010 को दो और एक के बहुमत के फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच में कहा गया कि जमीन को तीनों पक्षों निर्मोही अखाड़ा, रामलला और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बांट दिया जाए मगर सभी पक्ष ने आपत्ति जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में आवाज उठाई और न्यायालय ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी ।कोर्ट ने न्यायमूर्ति एफ एम कली फुल्ला की अध्यक्षता में एक मद्यस्त पैनल बनाया जिसमें आध्यात्मिक गुरु रविशंकर शामिल थे ।कोर्ट का उद्देश्य सर्वमान्य समाधान निकालना था मगर विभिन्न राजनीतिक तत्व इसे लटकाने और निलंबित करने की कुब्बत लडाते रहे ।आज अंततः सुप्रीमकोर्ट ने सर्वमान्य समाधान दिया है तो फिर क्यों यह लगवा भगवा राम नाम के तूफान में आसमान में उड़ रहे हैं और क्यों यह आला वजीर पीर पैगंबर हिंदू मुस्लिम के बीच गहरी खाई खोद रहे हैं ?आखिर मंदिर मस्जिद का आडम्बर कब थम सकेगा?

  • आस्था केंद्रों में केवल आडंबर पूजा जाता है ।इनमें न कभी मानव धर्म की भक्ति पैदा हुई न कभी इसके हित सर्वशक्तिमान दिव्य शक्ति पैदा हुई ।देश निरंतर देसी व विदेशी लिप्त लोलुपो, जाति धर्म सत्ता के शहंशाहों,पूंजीवादी माफियाओं धन बाहुबलियों,डॉन सरगनाओ एवं दरिं हस्तियों के क्रूर आगोश में घुटता तड़पता रहा ।आज हर तरफ अय्याशी ऐशगाह,सुरा शराब जिस्मफरोशी, गुंडागर्दी, चोरी डकैती अपहरण हिंसा बलात्कार, उग्रवाद व आतंकवाद आदि सब इस महामहिम भारत भूमि को गंभीर तम चुनौती दे रहे हैं ।जबकि ये लगवा भगवा आज जहां एक तरफ हर हर मोदी की लहरों में देश का बेड़ा बीच मझदार ला खड़ा कर गए है वही राम नाम के तूफान में न वार न पार बस डूबने ही वाले हैं ।

अंततः वक्त के रहते इन बुतपरस्तो को बता देना चाहते हैं कि अब ढोंग आडंबर का चोगा हटाकर सत्य मानव धर्म की स्थापना करें ।यह शक्ति भक्ति इतनी खोखली हो गई है कि इसमें त्याग संयम और समर्पण भावना शक्ति शून्य हो चुकी है ।उदाहरण के लिए विश्व जगत योग गुरु अरबपति बाबा रामदेव एक सियासी मुद्दे को लेकर अनशन में क्या बैठ गए लो चार दिन में उठ पड़, लो ऑक्सीजन व मेडिकल ट्रिप्स लो अनशन तोड़ने के लिए विवश। जबकि ऐसे जगजाहिर योगी को इतने अल्प समय में एक ही आसन पर रहने की क्षमता होनी थी और वही उस लोकपाल अग्रदूत केजरी ने भी उसे जोगपाल कहकर उपहास उड़ाया था। वहीं दूसरी तरफ विश्व विख्यात संत रामदेव औरत की चूड़ियों में बधकर इस देश के त्याग स्वाभिमान और बलिदान को शर्मसार कर गए। साथ ही दुनिया देख रही है आसाराम से लेकर गुरमीत राम रहीम व रामपाल तक ये शिक्षा व धर्म के महा दिगदर्शक कितने सत्य और शक्तिमान है ।याद रहे कानून से बचने के लिए आसाराम ने दो करोड़ लागत की एक तांत्रिक टोपी तथा 90 लाख की पगड़ी बनाई थी जिसके विरुद्ध इसी संदेशवाहक निर्दल बंधु ने शाह टाइम्स में एक शीर्षक "युगांत कारी जंग लड़नी होगी भारत नवनिर्माण के लिए" के तहत जो सचेतना व्यक्त की शायद करोड़ों भारतीयों के दिल से छुइ होगी और आसाराम कानून के दायरे में देख लिए होंगे। भले ही उनके परम भक्त मोदी आज राम नाम का बेड़ा लेकर बीच मझदार खड़े हैं।

ऐसी कई अंतः चेतना इस संदेश वाहक के संघर्षों से जुड़ी है जो नीरज जोशी के सहयोग से उसके वर्तमान रचनाधीन काव्य संग्रह "युग चेतना संघर्ष संघ" मे क्रमब्ध सजाई गई है। चार दशक जन संघर्षों के पार "शहीदों को नमन "कार्यक्रम के तहत उन क्षेत्रों से आवाम को साक्षात कराने के संघर्ष में आज उसे यह रामलहर और झकझोर जाती है कि देश का निकट भविष्य किसी और बड़े संकट की ओर है ।देश का सारा धन यह मंदिर व आस्था केंद्र हड़प गए साथ ही हिंदुओं में दलित स्वर्ण बाद या फिर हिंदू मुस्लिम बाद को खूब लड़ा गये।आज तो राम को अब दुनिया का भगवान जताकर अयोध्या में बसाना है तो क्यों ना अरबों खरबों उड़ाकर देश दुनिया का सबसे बड़ा और भव्य मंदिर बना लेंगे? अभी तो एक बाबर आया मंदिर तोड़ गया राम आराम कर रहे थे और सैकड़ों बरस बुतपरस्तो ने लड़ झगड़ जान हथेली पर खेल यह मंदिर वापस ले लिया तो राम पुनः दुनिया की भगवान बन जाग गए हैं मगर आने वाले बाबरो को क्या वे राम अब रोक लेंगे ?वे कभी नहीं ।सारा देश मद मोद में लोटपोट होगा और गैरों के आगोश में होगा ,यह सत्य सिद्ध चेतना चुनौती है। तो आए सैकड़ों मीटर लंबी मूर्तियां बनाकर भारत के लालो का उपहास न करें और अंधविश्वास के लाखों दिए जलाकर मानव धर्म के दामन में अंधकार न करें ।राम एक व्यक्ति है उसने इस भूमि में जन्म लिया है।

उसका मालिकाना हक उसका जन्म सिद्ध अधिकार है उसके मानने वाले उसकी अनंत गुड़गाथाओ के समुंदर में गुमराह देश का बेड़ा न डूबा डालें। मानने के लिए हर किसी को माने ,इसमें क्या कहे मगर उसके नाम लूट शोषण व भ्रष्टाचार का पाखंड बंद करो ।तुम और तुम्हारे 80% दलितों का कब एक मंदिर होगा ?तुम्हारे हजारों वर्ष पुराने इस झगड़े का कोर्ट कब न्याय करेगा? वह भगवान अपना कुछ नहीं बचा सका, न सरयू के प्रलय से अयोध्या को न लुटेरों के हाथ से भक्तों के अपने मंदिर को ।जो भी किया है यह जनता ने ही किया है भले हिंदू आज अपनी वाहवाही का केंद्र राम मंदिर बना ले मगर इस महामहिम भारत भूमि पर जब तक भारतीय साहित्यकार वियोगी हरि का मंदिर नहीं बन जाएगा तब तक यह विनाशकारी उपद्रव थमने वाले नहीं हैं ।उन दिव्य दिवंगत की आत्मा बहुत अशांत है ।वह विश्व मंदिर जहां मंदिर मस्जिद का झगड़ा नहीं होगा, हिंदू-मुस्लिम का दंगा नहीं होगा, दलित स्वर्ण बाद नहीं होगा बल्कि सभी एक मानव धर्म के सदस्य होंगे !वहां कुबुद्धि कुविकार के कुकृत्य नहीं होंगे वहां सनातन, सद्बुद्धि ,सद्वबिचार व सन्मार्ग में सत्य सदाचार सत्कर्म होंगे। उस मंदिर में न काले धन के अतुल भंडार होंगे और न छल पाखंड के घोर अत्याचार होंगे ।वहां केवल विश्व मानव की सहानुभूति सद्भावना सतप्रेरणा और आदर्श शिक्षा संस्कृति की उपासना होगी ।वहाँ केवल आदर्श जनभाबना के दीप जलेंगे और वही विश्व शांति का पाठ पढ़ा व पढ़ाया जाएगा ।उस विश्व मंदिर के आगन में दूसरों की पीड़ा के लिए यीशु फिर से अवतार लेंगे जिन्हें इन बुतपरस्तो ने शूली में लटका दिया। उस मंदिर के आंगन में सुकरात जैसे दार्शनिक फिर जन्म लेंगे जिन्हें इन हवाशियो ने मृत्युदंड का जहर पीने को विवश कर डाला। उस आगन में फिर से धरतीपुत्र सरदार भगत पैदा होंगे ।मां माटी के लिए जिन्होंने बैरी का दिल दहका दिया। इस आगन में फिर वह उत्तराखंड की वीरबाला तीलू रौतेली अवतार लेंगी जिसने इन बुतपरस्तो अत्याचारों से 15 से 22 वर्ष की उम्र में एक दर्जन युद्ध लड़े थे इसके अलावा वे गढ़वाल मलेथा के माधव सिंह जिन्होंने अभिमान का पहाड़ तोड़ स्वाभिमान की गंगा बहा दी थी, कुमाऊ के वह मोहन पांडे जिन्होंने 40 उग्रवादी मुठभेड़ों को ठिकाने लगाकर ए वतन के लिए प्राण दे दिए थे और वे उत्तराखंडी मोहन बाबा जन्म लेंगे जिन्होंने 42 दिन अनशन में चन्द्रनगर गैरसेड़ के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे और इस आंगन में वे भीम भयंकर फिर अवतार लेंगे जिन्होंने देश दुनिया के करोड़ों दीन दुखियों उपेक्षित पीढ़ियों को स्वाभिमान व अमन की जिंदगी देकर इस देश को विश्व का सबसे श्रेष्ठ संविधान दिया था । इस आंगन में कुमाऊ के वे भीम भूमित्र फिर अवतार लेंगे जिन्होंने कलयुग का भूमित्र पुराण रच इन बुतपरस्तो को सचेत किया था । इसी आंगन में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का शांतिनिकेतन स्थापित होगा जिन्होंने गीतांजलि के तहत इन बुतपरस्तो को परास्त किया ।इसी आंगन में विश्व मातृ शक्ति मदर टेरेसा पुनः करोड़ों दीन दुखियों को गले लगा लेगी और इसी आंगन में इसी उत्तराखंड से युग चेतना संघर्ष की एक नई स्वर्णिम युग क्रांति उठेगी और तभी नवभारत का नया युग नया सवेरा उदय होगा ।अतः राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर अब झगड़ा बंद करें सनातन काल से आक्रोशित दिवंगत दिव्य शक्तियों ने नव निर्माण के लिए आज अंगड़ाई ले ली है अतः सचेत किया जाता है कि ये बुतपरस्त अब सावधान रहें अन्यथा कोई अपूर्व आपातकाल देश के शेष अस्तित्व को लील निकल सकता है।

अंततः सभी हिंदू सिख मुस्लिम ईसाई भाइयों से आज परम निवेदन है कि अतीत की सभी बुराइयों कमियों और गलतियों को छोड़कर नीले आसमान के नीचे एक विश्व मानव धर्म का विश्व मंदिर स्थापित करें ।स्वार्थ शोषण प्रभुत्व व दमन की जन्मजात वृत्ति प्रवृत्तियों का अंत करें और आदर्श मानवता के शिक्षा संस्कार जागृत करें। इसके लिए इन आडंबर के मंदिरों व आस्था धामों को जन जागृति शिक्षा-दीक्षा की पाठ शालाओं में तब्दील करें और राम बाबरी मस्जिद पर ना लड झगड़ ।विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मुस्लिम विश्वविद्यालय स्थापित करें जहां पर विश्व मानव धर्म की शिक्षा दीक्षा कायम रहे तो आए सभी को एक साथ लेकर नव भारत निर्माण में अपना अहम योगदान अदा करना होगा ।आप ही करोड़ों को कल करोड़ों देवी देवता वक्त मान सकेगा और भारत निरंतर दुनिया में धरती का सच स्वर्ग खंड बना बना रहेगा ।यदि ऐसा नहीं तो निकट भविष्य में देश काल को संभालने वाला कोई नहीं होगा यही सत्य सिद्ध अंतिम चेतना चुनौती है।

जनकवि निर्दलबंधु गंगाराम आर्य

युग चेतना संघर्ष संघ बिंदुखत्ता ।।

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