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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

मन का मंदिर ।। जनकवि गंगाराम आर्य

मन का मंदिर महान है मंदिर मस्जिद समान है । फिर राम बावरी की बला खड़ी क्यों गुमराह यहां इंसान है ।।

ये काशी मथुरा बद्री केदार मक्का मदीना ये तीर्थ हजार। सच सद्भाव सहानुभूति हो तो मन का तीर्थ सर्व प्रधान है ।।

बुद्धि बल से बॅध गया संसार बॅध न सका मनका सुमार । मन में अच्छाइयों की अनुभूति हो तो नेक भावना शक्ति ही भगवान है ।।

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