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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

बेटी महान आज भी हैरान ।।जनकवि निर्दलबंधु

वेदों में लिख गई अपाला वह भारत की बेटी कब कहां अज्ञान । इतिहास के पन्नों में स्मरणीय है इस बेटी का सतसाहस स्वाभिमान ।।

श्रजनकारी सरस्वती स्वरूप संहार कारी महाकाली समान । हर युग हर देश काल में यहां पुरुष से महान नारी का योगदान ।।

शैव्या सीता सती सावित्री और नारी विद्योत्तमा रत्नावली समान । एक ने मूर्ख कालिदास को तो एक ने अंधे तुलसी को दिया ज्ञान ।।

उत्तराखंड के वीर वाला महान नारी एक तीलू रौतेली के समान । देश की यह एक मात्र बेटी जो अत्याचारों से लड़ गई घमासान ।।

भारत की एक-एक आने वाली बेटी में भर गया अजेय स्वाभिमान । झांसी की लक्ष्मीबाई ने जो वह देश के लिए दिया प्रथम बलिदान ।।

हजरत बेगम का भी वह प्रथम आजादी के गदर का आह्वान । सच बेटी ने बदलना चाहा था बनाना चाहा था भारत महान ।।

सुर सम्राट लता हो या फिर भारत कोकिला सरोजिनी समान । दुनिया में बेजोड़ है भारतीय नारीत्व भारत की बेटी जग में रोशन मान ।।

सदैव सिर पर धोती धारण किए महामहिम प्रतिभा पाटिल समान । अपना देश अपना भेष सर्वोपरि है सर्वश्रेष्ठ है यह नारीत्व की पहचान ।।

आज कानून विद मीरा कुमार और बेटी किरण बेदी महान । बछेद्री पाल जैसी बेटियों ने एवरेस्ट मैं जा छू लिया आसमान ।।

मगर भारत की बेटी आज ही झेल रही सबसे शोषण अपमान । घर खेत मिल कारखानों में बेगार दे रही है बेटी जवान ।।

अस्मत लूट रही है बेटी की संकट में है मां बहनों की जान । मासूम जिस्म भी हवस के मुंह फल फूल रहा दरिंदगी का शैतान ।।

खुद उठ बेटी आज खुद बदलेगी कायम रहे तेरा देश भेष मान-सम्मान । घर चूल्हे से लेकर दफ्तर तक क्यों हो गई है आज भी हैरान ।।

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