Search
  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

परिचय

परम सम्मानित भाई बहनों बुद्धिजीवी समाज व जनसेवा के साथ ही समस्त संघर्षशील युवाओं के संज्ञान में एक ऐसे बेघर जनकवि निर्दल बंधु गंगाराम आर्य का परिचय लाया जाता है,जिसने 33 दिन सड़क में पत्थर तोड़कर कक्षा 9 में प्रवेश हेतु कॉपी किताब का खर्च जुटाया था। इसने दुर्गम पहाड़ की अति विषम परिस्थितियों के बीच 40 किमी घने जंगल व नदी नालों के पार पैदल आ जा कर इंटर संस्थागत के साथ ही 87%अंको सहित स्टेनोग्राफी प्रशिक्षण हासिल करने के लिए आए दिन प्राणलेवा संघर्ष झेले थे। उस अभाव व अंधकार के बीच घोर आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों का आघात झेल रहा छात्रकाल अति आहत हुआ। परिणाम स्वरूप अपना हर मौलिक सुख आराम छोड़ अपनी माटी अपने लोगों का सुख आराम ही भावी संघर्ष का एक लक्ष्य बना। देर रात चिराग तले सामाजिक एवं भावनात्मक सम्मान व समानता की स्वाभाविक कल्पनाओं को साकार करने की एक अटल शोध जगी। घर चूल्हे से लेकर उस आनंद भवन तथा परिभवन तक देशकाल की हर परिस्थिति को देखा और झेला। 10 वर्ष दर-दर कई पड़ाव में वह सोच संकल्प मजबूत हुआ।तत्पश्चात उत्तराखंड की संघर्ष भूमि ऐतिहासिक वसासत मिनी उत्तराखंड बिन्दुखत्ता में निरंतर तीन दशक तक आज असहाय असाध्य संघर्ष झेल चुका है। यहां कवि ने अबोध असहायों को निशुल्क साक्षर सक्षम बनाया। सन् 1993 में प्रिंट मीडिया से जुड़कर देश काल की ज्वलंत परिस्थितियों को निर्णायक आवाज दी।सन् 1996 से यहां सांस्कृतिक जनजागृति शुरू की, चंद कविता लेखों में दशक ढल गए,200 से अधिक कविता लेख आदि प्रकाशित हुए। राज्य व देश के प्रतिनिधित्व में कलम का योगदान दिया।सामाजिक हित में दिन-रात संघर्ष लड़े। कई किताबों की रचना में सिर हाथ घोटे।इस संघर्ष में पत्नी व बेटी अकाल मृत्यु को प्राप्त हुई।कवि निरंतर आज भी संघर्षरत है। अंततः हर तरफ अपेक्षा अभाव झेल रहा कवि 2 वर्षों से आज एक शोध पत्र की रचना में सब कुछ झेल रहा है। इस रचनाधीन हिंदी शोध पत्र की कुछ रचनाएं आपके समक्ष प्रस्तुत की जा रही हैं,और अपेक्षा है कि आप तन मन धन से कबि को सजिंदगी प्रदान कर महान जन सेवा के भागीदार बनेंगे। कष्ट हेतु अति धन्यवाद। आपका शुभचिंतक जनकवि निर्दल बंधु गंगाराम आर्य। फ़ोन नंबर -09456776351

17 views
  • Facebook
  • Instagram
  • YouTube