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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

घरानों से निकलके चल ।।


चल रे नौजवान चल

आज फिर संभल के चल।

मुश्किलों में देश है

घरानों से निकल के चल ।।


फिजाए तो ये जल रहीं

घुट रही हैं यह वादियां ।

खुशहालिया उजड़ रही

रे मच रही हैं तबाहीयां।।


जो वक्त अभी भी शेष है

इन आधियों में डट के चल।

मुश्किलों में देश है

घरानों से निकल के चल।।


पहाड़ियां तो दरक रहीं

दुःख रही हैं यह घाटियां ।

घर बाड़ियां भी सुलग रहीं

भड़क पड़ी हैं राजधानियां ।।


तिलमिला उठा हर एक है

अभी भी सोच समझके चल ।

मुश्किलों में देश है

घरानों से निकल के चल ।।


मनमानियां हैं जो चल रहीं

ढा रहीं हैं वो बरबादियां।

दीवालियां जो जल रहीं

छा रही हैं चिंगारियां ।।


मदमोद में मोदी नरेश है

रे तख़्त ताज बदल के चल।

मुश्किलों में देश है

घरानों से निकल के चल ।।


जनकवि निर्दलबंधु

युग चेतना संघर्ष संघ,

नैनीताल,उत्तराखंड ।

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