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  • जनकवि निर्दलबंधु ।।

आज भी ।। जन कवि गंगाराम आर्य

दुनिया के अनोखे महल में रहती है आज भी, शाहजहां की खूबसूरत बेगम मुमताज है ।

तारीफ तो कर लेता यह बेघर उसकी और आपकी, मगर रास्ते में कागज कलम भी मोहताज है ।।

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